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मेरी हसरतों पर,
लगने दे उमंगों के पर,
आज एक लम्भी उड़ान भरने दे..
मेरी आशाओं पर ,
लगा काबिलियत की मौहर,
उन ख्वाबों को आज सच होने दे,
ये ख्वाब अगर टूटें तो,
सिर्फ सच होने के लिए,
उस गुमशुदा सी हंसी से आज मिलने दे..
ऐ खुदा कर इतनी इनायत,
कर कबूल मेरी ये इबादत,
सपने देखकर उन्हें सच करने की हंसरत दे..
"ek chhoti si hasrat"
ReplyDeleteHmmm... bht accha hai sir :)
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